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Sunday, 20 December 2015

श्री राम स्तुति अत्रि मुनि द्वारा

जय जय श्री राम 


पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से इस स्तुति का पाठ सभी के लिए हितकारी होगा और वह व्यक्ति प्रभु श्री राम को ही प्राप्त होगा  == ऐसा मुनि अत्रि का वचन है 



प्रभु आसन आसीन भरि लोचन सोभा निरखि |
मुनिबर परम प्रबीन जोरी पानी अस्तुति करत ||

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नमामि भक्त वत्सलं | कृपालु शील कोमलं |
भजामि ते पदाम्बुजम | अकामिनाम स्वधामदं ||

निकाम श्याम सुन्दरम | भावंभुनाथ मंदरं |
प्रफुल्ल कंज लोचनं | मदादि दोष मोचनं ||

प्रलम्ब बाहू विक्रमं | प्रभो s प्रमेय वैभवं |
निषंग चाप सायकं | धरं त्रिलोक नायकं ||

दिनेश वंश मंडनं | महेश चाप खंडनं |
मुनीन्द्र संत रंजनं | सुरारी वृन्द भंजनं ||

मनोज वैरी वंदितं | अजादि देव सेवितं |
विशुद्ध बोध निग्रहं | समस्त दूषनापहम||

नमामि इंदिरा पतिं | सुखाकरं सतां गतिम् |
भजे सशक्ति सानुजं | शची पति प्रियानुजं ||

त्व्दंघ्री मूल ये नराः | भजन्ति हीन मत्सरा : |
पतन्ति नो भवार्णवे | वितर्क वीचि संकुले ||

विविक्त वासिनः सदा | भजन्ति मुक्तये मुदा |
निरस्य इंद्रियादिकं | प्रयान्ति ते गतिम् स्वकं ||

तमेकमद्भुतं प्रभुं | निरीह्मिश्वरम विभुं |
जगद्गुरूम च शाश्वतं | तुरीयमेव केवलं ||

भजामि भाव वल्लभं | कुयोगिनाम सुदुर्लभं |
स्वभक्त कल्प पादपं | समं सुसेव्यमंव्हम ||

अनूप रूप भूपतिम | नतोःमुर्विजपतिम |
प्रसीद में नमामि ते | पदाब्ज भक्ति देहि में ||

पठन्ति ये स्तवं इदं | नरादरेण ते पदं |
व्रजन्ति नात्र संशयं | त्वदीय भक्ति संयुताः ||

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बिनती करी मुनि नाई सिरु कह कर जोरी बहोरी |
चरन सरोरुह नाथ जनि  कबहूँ तजै मति मोरी ||


                                                श्री राम जय राम जय जय राम